आसुरी शक्ति और सभ्यता पर दैवी संस्कृति की विजय का दिन, विजयादशमी भारत के जन-जन का विजयपर्व है

विजय में किसी का पराभव नहीं होता राक्षसों का भी नहीं हुआ केवल रावण के अहंकार का संहार हुआ। राक्षसों की सभ्यता नष्ट नहीं हुई अपितु उसे दैवी संस्कृति का सहकार मिला। विजय का सभ्यतागत अर्थ है सर्वोदय के भाव से मानव एवं सभ्यता के रिपुओं का दमन।

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