कृषि क्षेत्र में किए गए सुधार उतने ही महत्वपूर्ण हैं जितने 1991 में उठाए गए आर्थिक सुधार के कदम थे
तीन नए कृषि कानूनों ने हमारे अन्नदाता किसानों को अनेक बंधनों से मुक्ति दिलाई है। अब 21वीं सदी में भारत का किसान बंधनों में नहीं खुलकर खेती करेगा। जहां मन आएगा अपनी उपज बेचेगा। किसी बिचौलिये का मोहताज नहीं रहेगा।from Jagran Hindi News - editorial:apnibaat https://ift.tt/340lUve
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