गुणवत्तापूर्ण शिक्षकों से ही हम कक्षाओं को रोचक और आलोचनात्मक चिंतन का बना सकते हैं केंद्र
शिक्षा के दो विशिष्ट स्वरूप हैं। एक स्वरूप इसका उदार पक्ष है जो समाज-विज्ञान के किसी भी विषय की तरह पढ़ा एवं समझा जाता है।from Jagran Hindi News - editorial:apnibaat https://ift.tt/3262L96
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