मनुष्य के जागरण की बेला है नव वर्ष
नव वर्ष हमें ओढ़ने का नहीं आत्मसात कर लेने का आह्वान करता है। आत्मसात करने से जीवन का कायाकल्प हो जाता है जबकि ओढ़ी हुई चादर तो समय के साथ फट जाती है।from Jagran Hindi News - editorial:apnibaat https://ift.tt/2MKWOHY
Leave a Comment