टला नहीं आतंक का खतरा: खुद को प्रासंगिक बनाए रखने के लिए आइएस किसी भी हद तक जा सकता है

बड़ा सवाल यही है कि लोगों को कट्टरपंथी विचारधारा की चपेट में आने से कैसे रोका जाए क्योंकि आइएसआइएस इस्लामिक धर्मग्रंथों को ही अपनी ढाल बनाता है।

from Jagran Hindi News - editorial:apnibaat http://bit.ly/30hmG31

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