सियासत से साहित्य की ओर: मुखर हुए नहीं कि राजनीति और साहित्य दोनों आपसे मुकरने लगते हैं
सत्ता और राजनीति में चुप रहकर ही रसपान किया जा सकता है। इससे किसी प्रकार का विघ्न नहीं पड़ता।from Jagran Hindi News - editorial:apnibaat http://bit.ly/2w3rXgW
सत्ता और राजनीति में चुप रहकर ही रसपान किया जा सकता है। इससे किसी प्रकार का विघ्न नहीं पड़ता।
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