सियासत से साहित्य की ओर: मुखर हुए नहीं कि राजनीति और साहित्य दोनों आपसे मुकरने लगते हैं

सत्ता और राजनीति में चुप रहकर ही रसपान किया जा सकता है। इससे किसी प्रकार का विघ्न नहीं पड़ता।

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