आम चुनाव के नतीजों के साथ ही अहंकारी विशिष्ट बौद्धिक वर्ग की खानदानी सत्ता सदा के लिए चली गई

देश में प्रचलित राजनीतिक मुहावरे बदल रहे हैं। विचार-विमर्श में ‘लिबरल’ ‘सेक्युलर’ आदि बुरे शब्दों में बदल गए हैैं जिनका प्रयोग अब नहीं हो रहा।

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