जब प्रतिनिधि जनता की इच्छा का सम्मान न करें तो फिर स्वशासन केवल दिखावा रह जाता है

सीधे जनमत संग्रह के विरोध में एक तर्क यह दिया जाता है कि जनता को विषयों का पर्याप्त ज्ञान नहीं होता है।

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