येचुरी की दृष्टि में रामायण-महाभारत में हिंसा है, लेकिन उन्हें ‘वसुधैव कुटुंबकम’ वाला दर्शन नहीं दिखाई पड़ता

‘अहिंसा की कल्पना का संबंध ध्येय से था। इसका मतलब यह नहीं था कि जरूरी हो तब भी हिंसा नहीं करनी चाहिए।’

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