नेताओं के आरोप-प्रत्यारोप के दौर से परेशान मतदाता चुनावी चक्रव्यूह खत्म होने का इंतजार कर रहे हैं
‘पार्टी ही परिवार है’ से आरंभ हुई समाजवादी सोच ‘परिवार ही पार्टी है’ पर आकर थमी है। शीघ्रतिशीघ्र चुनावी चरण पूर्ण हों और लोकतंत्र अपने स्वाभाविक स्वरूप में लौटे।from Jagran Hindi News - editorial:apnibaat http://bit.ly/2PNnRlS
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