चुनाव में लेखकों की साख का सवाल, लेखक जनता का पक्षधर है, किसी दल का नहीं

यदि दो सौ लेखक चुनाव के समय मतदाताओं से अपील कर रहे हैं तो शायद यह मानकर कि ऐसा करना उनका दायित्व है मगर यह दायित्वबोध उनके भीतर 2019 में ही क्यों पैदा हुआ?

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