पूंजी की कठपुतली बनी राजनीति: धनबल और बाहुबल पर आत्मबल और नैतिकबल अधिक भारी

राजनीति प्रगतिशील एवं विकासोन्मुखी हो जन-जन के जीवन में परिष्कार आए और लोक को सही दिशा मिले यही राजनीति का अभिप्राय है।

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