घरौंदों में अपनों का इंतजार कर रहीं बेबस-बूढ़ी आंखें, नौजवान शहरों में गए कमाने
गांव के युवा परिवारों सहित अन्य शहरों में पलायन कर गए और गांव में सिर्फ बूढ़े-मां बाप को छोड़ गए। साल में एक-दो बार बच्चे आते हैं या फिर खर्च भेज देते हैं।from Jagran Hindi News - news:national https://ift.tt/2SJ5AWV
Leave a Comment