राजनीति से विदा होता समाजवाद: चुनाव में पहले विचारधाराएं टकराती थीं, अब व्यक्तिगत आरोप हावी हैं

विचारहीन शोर ने चुनाव महोत्सव का आनंद छीन लिया है। अपशब्द हावी हैं। लोकतंत्र के चीरहरण की आशंका है।

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