चुनावी चक्रव्यूह की गुत्थी सुलझी: मौजूदा सीट का किसी और के लिए नहीं, अपने बेटे के लिए त्याग करो
चक्रव्यूह का प्रथम द्वार टिकट तो पिता ने पार करा दिया। अब विजयश्री का अंतिम द्वार तो उसे खुद ही तोड़ना होगा।from Jagran Hindi News - editorial:apnibaat https://ift.tt/2ToXNhf
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