इस बार चुनाव का पर्व होली से ही शुरू हो रहा है इसलिए सबको कीचड़ उछालने का मौका मिल रहा है
विरोधी पर टूटते हैं तो उसे टूटने का मौका भी नहीं देते। इतना सुनते ही जनसेवक जी के अंदर का बनारसी शर्बत उबल पड़ा। जोर से बोल पड़े-‘अब होली है तो मुमकिन है!’from Jagran Hindi News - editorial:apnibaat https://ift.tt/2W7cU0F
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