भारतीय इतिहास पर नए नजरिये की जरूरत: साम्राज्यवादी और वामपंथी पूर्वाग्रहों की भरमार

भारत में अनेक विविधताएं हैं। इन्हें बेशक इतिहास में जगह दी जानी चाहिए, लेकिन पूरब से पश्चिम और उत्तर से दक्षिण तक समूचे भारत में एक सांस्कृतिक प्रवाह है।

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