न बिकने का मलाल: पहले घोड़ों पर ऊंचे दांव लगते थे, अब खिलाड़ियों पर लगती हैं बोलियां
अब नए सजते बाजार के हिसाब से ही खेल की कोई नई साज छेड़नी पड़ेगी।from Jagran Hindi News - editorial:apnibaat http://bit.ly/2FcZDOI
अब नए सजते बाजार के हिसाब से ही खेल की कोई नई साज छेड़नी पड़ेगी।
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