न बिकने का मलाल: पहले घोड़ों पर ऊंचे दांव लगते थे, अब खिलाड़ियों पर लगती हैं बोलियां

अब नए सजते बाजार के हिसाब से ही खेल की कोई नई साज छेड़नी पड़ेगी।

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