चुनाव अब राजनीतिशास्त्र का विषय नहीं रह गया, गणित के सिद्धांतों से परिचालित होते हैं

अब के समय में चुनाव चेहरे और चरित्र को सामने रखकर नहीं लड़े जाते हैं। चेहरे बाद में तय होते हैं।

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