समानांतर सिनेमा के महारथी का अवसान, सिनेमा की दूसरी दुनिया के शिल्पकार थे मृणाल सेन

सेन अपनी हर फिल्म को वर्तमान से जोड़ते थे। फिल्म जब अपने समय से जुड़ती है तभी प्रासंगिक बनती है।

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