सुलझाना होगा राष्ट्रभाषा का सवाल, राष्ट्रनिर्माण और समाज के संचालन के लिए भाषा अपरिहार्य है

गांधी जी कहते थे कि ‘अंग्रेजी की मोहिनी के वश होकर हम लोग हिंदुस्तान को अपने ध्येय की ओर आगे बढ़ने से रोक रहे हैं।’

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