जीवन भर कुछ भी ठीक नहीं चला, न कल ठीक-ठाक था और न आज ठीक-ठाक है
यह तो भाग्य का खेला है कि किसी की पांचों अंगुलियां घी में रहती हैं और किसी को सूखी रोटी भी नहीं मिलती।from Jagran Hindi News - editorial:apnibaat https://ift.tt/2r27M0e
यह तो भाग्य का खेला है कि किसी की पांचों अंगुलियां घी में रहती हैं और किसी को सूखी रोटी भी नहीं मिलती।
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