लोकतंत्र के मायाजाल में सत्ता, प्रशासन और शासन का भ्रमजाल

प्रत्येक पटाक्षेप के उपरांत जब पर्दा उठता है तो कलाकार बदलते हैं, पटकथा के साथ ही पात्र वही रहते हैं।

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