समृद्धि और प्रकाश की पोषक परंपरा है दिवाली

भारतीय परंपरा में दीपपर्व की निरंतरता है। सातवीं शताब्दी के संस्कृत नाटक नागनंद में इसे ‘दीपप्रति पादुत्सव’ कहा गया है।

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