समृद्धि और प्रकाश की पोषक परंपरा है दिवाली
भारतीय परंपरा में दीपपर्व की निरंतरता है। सातवीं शताब्दी के संस्कृत नाटक नागनंद में इसे ‘दीपप्रति पादुत्सव’ कहा गया है।from Jagran Hindi News - editorial:apnibaat https://ift.tt/2F1GkJS
भारतीय परंपरा में दीपपर्व की निरंतरता है। सातवीं शताब्दी के संस्कृत नाटक नागनंद में इसे ‘दीपप्रति पादुत्सव’ कहा गया है।
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