हमारे देश के कानून क्यों दूसरे पक्ष के प्रति होने वाले अन्याय के बारे में नहीं सोचते?

सत्ताएं चाहे वह पुरुषों की हों या स्त्रियों की वे अपने नफे-नुकसान से ही चलती हैं।

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