भीड़ का उन्माद हमारे राष्ट्र का मूल स्वभाव नहीं है, बढ़ती हिंसा सभ्य समाज पर कलंक है

भीड़ द्वारा हिंसा सभ्य समाज पर कलंक है। इससे बचने बचाने के लिए वाणी पर संयम भी जरूरी है। भीड़ का उन्माद राष्ट्र का मूल स्वभाव नहीं।

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