अकादमिक और सरकारी कामकाज में हिंदी के सरल, सरस और सुबोध प्रयोग को बढ़ावा देना होगा

आज भी सांस्कृतिक आयोजनों में सूर का पद, कबीर की बानी, प्रसाद की कामायनी, मैथिलीशरण गुप्त का वीर रस विद्यमान है।

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